How do you get government security? : जानिए किसको मिलता है सरकारी संरक्षण? मानदंड क्या हैं? वास्तव में राज्य और केंद्र की क्या भूमिका है?

सरकारी सुरक्षा किसे और कैसे मिलती है?

संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य के अंतर्गत आती है। किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

ये सुरक्षा तंत्र निर्धारित करते हैं कि जोखिम के आधार पर किसे सुरक्षा मिलती है। यदि किसी व्यक्ति को आतंकवादियों या चरमपंथियों द्वारा धमकाया या धमकाया जाता है, तो उस व्यक्ति की रक्षा की जाती है। इतना ही नहीं अगर किसी की जान को माफिया या गुंडों से खतरा है तो राज्य सरकार उस व्यक्ति को सुरक्षा भी मुहैया कराती है.

जोखिम मूल्यांकन के आधार पर, संरक्षित व्यक्ति की सुरक्षा बढ़ाई जाती है, घटाई जाती है या वापस ली जाती है। यह सुरक्षा विशेषज्ञों की दो समितियों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा, राज्य सरकारें सुरक्षा कवर वाले व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करती हैं।

केंद्र सरकार की क्या भूमिका है?

केंद्र सरकार केंद्रीय स्तर पर सुरक्षा संभालती है। केंद्र सरकार उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारियों जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा केंद्र सरकार उन लोगों को भी सुरक्षा मुहैया कराती है, जिनकी जान को खतरा है। इसमें समाज के उच्च वर्ग के लोग शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने सुरक्षा के लिए पांच कैटेगरी बनाई है। इनमें X, Y, Y+, Z और Z+ शामिल हैं। खतरे के स्तर के आधार पर, एक व्यक्ति को एक निश्चित स्तर की सुरक्षा प्राप्त होती है।

देश में कितने लोगों को मिलती है सुरक्षा?

अभी तक कोई नया आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। पिछले साल नौ मार्च को गृह राज्य मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि केंद्र सरकार 230 लोगों को सुरक्षा मुहैया कराएगी.
इसके अलावा, राज्य सरकार 19,000 से अधिक लोगों को सुरक्षा प्रदान करती है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2019 तक, देश भर में 19,487 VIP थे, जिनकी सुरक्षा में 66,043 पुलिस कर्मी थे।

सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को मिलती है एसपीजी सुरक्षा

इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री और उनके करीबी सहयोगियों की भी एसपीजी सुरक्षा तक पहुंच थी। लेकिन दो साल पहले एसपीजी एक्ट में संशोधन किया गया था। उसके बाद सुरक्षा के इंतजाम सिर्फ मौजूदा प्रधानमंत्री के पास होते हैं.
एसपीजी के सुरक्षा इंतजाम काफी सख्त माने जा रहे हैं, लेकिन जवानों की संख्या निश्चित नहीं है. यह संख्या खतरे की गंभीरता के आधार पर उतार-चढ़ाव करती है। SPG बेड़े में वाहन और विमान भी शामिल हैं।

कैसा है प्रधानमंत्री का सुरक्षा कवच?

एसपीजी कमांड की सुरक्षा 4 स्तर की होती है। पहले स्तर पर सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी की टीम की होती है। 24 एसपीजी कमांडो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात हैं। कमांडो के पास FNF-2000 असॉल्ट राइफल है। अर्ध-स्वचालित पिस्तौल और अन्य परिष्कृत हथियार हैं।

पीएम बुलेट प्रूफ कार में हैं। काफिले में 2 बख्तरबंद वाहन शामिल हैं। 9 हाई-प्रोफाइल वाहनों के अलावा एंबुलेंस और जैमर हैं। प्रधानमंत्री के काफिले में डमी कारें भी दौड़ती हैं। इस काफिले में करीब 100 जवान शामिल हैं।

वीआईपी की सिक्योरिटी को लेकर कैसे लिया जाता है फैसला

देशभर के वीआईपी को अलग-अलग कैटेगरी की सिक्योरिटी उपलब्ध करवाई जाती है. वीआईपी, हाई प्रोफाइल सेलीब्रिटीज, खिलाड़ी और मशहूर शख्सियतों को एसपीजी, एनएसजी और सीआरपीएफ सुरक्षा उपलब्ध करवाती है. इनकी सिक्योरिटी कई लेवल की होती है. वीआईपी के ऊपर खतरे के स्तर को देखते हुए उन्हें X, Y, Z और Z+ की सिक्योरिटी दी जाती है.

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री अपनेआप इस तरह की सिक्योरिटी कवरेज में आते है. इन सबके अलावा बाकी वीआईपी के सिक्योरिटी लेवल को लेकर एक कमिटी फैसला लेती है.

वीआईपी के सिक्योरिटी लेवल को लेकर कौन लेता है फैसला

देशभर के वीआईपी के सिक्योरिटी लेवल को लेकर एक कमिटी फैसला करती है. इस कमिटी में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी, गृह सचिव और गृहमंत्री होते हैं. हालांकि कई मौकों पर इसमें राज्य सरकार की सिफारिश भी काम करती हैं. राज्य सरकार किसी वीआईपी की सुरक्षा घटाने या बढ़ाने की सिफारिश कर सकती है. महाराष्ट्र सरकार ने फिलहाल यही किया है.

X, Y, Z और Z+ में कैसी होती हैं सुरक्षा की सुविधाएं
वीआईपी के ऊपर मंडरा रहे खतरे के स्तर को देखते हुए सिक्योरिटी लेवल को मुख्यतौर पर 4 भागों में बांटा गया है. ये चार लेवल हैं- X, Y, Z और Z+. इसमें Z+ सबसे बड़ा और सख्त सिक्योरिटी लेवल होता है. प्रधानमंत्री जैसे देश के सबसे बड़े पदों पर बैठे वीआईपी को Z+ के साथ स्पेशल एसपीजी कवर भी दिया जाता है.

X कैटेगरी सबसे बेसिक सिक्योरिटी लेवल है. X कैटेगरी के सिक्योरिटी लेवल में दो पुलिस कर्मियों के साथ एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर का सुरक्षा घेरा उपलब्ध करवाया जाता है.

इसी तरह से Y कैटेगरी X से ऊपर की कैटेगरी है. इसमें सुरक्षा घेरा ज्यादा सख्त हो जाता है. Y कैटेगरी में 11 पुलिसकर्मियों के साथ 2 पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर का सुरक्षा घेरा होता है.

इसके बाद Z कैटेगरी का सिक्योरिटी लेवल आता है. इसमें वीआईपी के सुरक्षा घेरे में 22 पुलिसकर्मी मौजूद होते हैं. इसके साथ ही दिल्ली पुलिस या सीआरपीएफ के जरिए एक्स्ट्रा सिक्योरिटी दी जाती है. Z कैटेगरी की सुरक्षा पाए वीआईपी के साथ एक एस्कॉर्ट कार भी चलती है.

ऐसी होता है Z+ सिक्योरिटी कवर

Z+ कैटेगरी सबसे सख्त सुरक्षा व्यवस्था वाली कैटेगरी है. इसके ऊपर सिर्फ एसपीजी सिक्योरिटी लेवल होता है. Z+ सिक्योरिटी लेवल में 36 पुलिसकर्मियों का सुरक्षा घेरा होता है. Z+ कैटेगरी वाले सुरक्षा गार्ड्स अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. उनके पास सुरक्षा से लेकर संचार के सबसे मॉर्डन तकनीक होती है.

इस कैटेगरी की सुरक्षा पाए वीआईपी का सुरक्षा घेरा 24 घंटे तैनात रहता है. इनके सुरक्षा घेरे में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के 28 कमांडो होते हैं. इसके साथ ही एक एस्कॉर्ट, एक पायलट और उसके पीछे चलने वाली एक कार, कोबरा कमांडो और 12 होम गार्ड्स का दस्ता होता है.

एसपीजी पर खर्च किए जाते हैं करोड़ों

एसपीजी का गठन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1988 में हुआ था. एसपीजी की सिक्योरिटी प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके नजदीकी परिवारवालों को दी जाती है.

एसपीजी में फिलहाल 4 हजार सुरक्षागार्ड्स हैं. इनके ऊपर सालाना 330 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं. ये देश का सबसे खर्चीला सुरक्षा व्यवस्था है.

पूर्व प्रधानमंत्री को पद छोड़ने के एक साल बाद तक एसपीजी की सुरक्षा मिलती रहती है. इसके बाद उनसे एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली जाती है.

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